
नाल-ऐ-दिल बोहोत अदना है गो फसाने में
हमको इक उम्र लगेगी तुम्हें सुनाने में
क़दम क़दम पे बोहोत दिल को अज़ीयातें दी हैं
रहे हैं फिर भी शिकस्ता तुम्हें भुलाने में
ये दो घड़ी की जो मुश्किल थी टटल गई होती
ज़रा सी देर न की तुमने भूल जाने में
मैं बारिशों से भी अश्कों की न बचा पाया
फलक को जिद सी रही आशियाँ जलाने में
किया था तुम पे भरोसा मगर तुमने
कोई कसर न उठाई है दिल दुखाने में
बुरा हुआ जो इस दिल पे मुश्किलें गुजरीं
गँवाए हमने सभी दोस्त आजमाने
मैं लम्स लम्स पिघलता रहा मानिंद-ऐ-शमा
मिटा के रख दिया खुदको वफ़ा निभाने में
परिस्तिशों का हमारी यहाँ सिला ये मिला
तमाशा बन गए संगदिल से दिल लगाने में
चले भी आओ के तुम बिन कोई कमी सी है
तुम्ही दो ढूंढता रहता है दिल ज़माने में